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Couplet #6
December 17, 2015
ख़्यालों में हों रूबरू, लफ़्ज़ों में न हो गुफ़्तगू,
बयाँ करने का न तक़ल्लुफ़ हो, ऐसे ही इश्क़ की है जुस्तजु।
©मयन
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